SELECT KANDA
SELECT SUKTA OF KANDA 06
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Atharvaveda Shaunaka Samhita – Kanda 06 Sukta 097
By Dr. Sachchidanand Pathak, U.P. Sanskrit Sansthan, Lucknow, India.
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अभिभूर्वीरः
-३ अथर्वा। १,३ देवाः, २ मित्रावरुणौ। १ त्रिष्टुप्, २ जगती, ३ भुरिक्।
अ॒भि॒भूर्य॒ज्ञो अ॑भि॒भूर॒ग्निर॑भि॒भूः सोमो॑ अभि॒भूरिन्द्रः॑ ।
अ॒भ्य॑हं विश्वाः॒ पृत॑ना॒ यथासा॑न्ये॒वा वि॑धेमा॒ग्निहो॑त्रा इ॒दं ह॒विः ॥१॥
स्व॒धास्तु॑ मित्रावरुणा विपश्चिता प्र॒जाव॑त् क्ष॒त्रं मधु॑ने॒ह पि॑न्वतम्।
बाधे॑थां दू॒रं निरृ॑तिं परा॒चैः कृ॒तं चि॒देनः॒ प्र मु॑मुक्तम॒स्मत्॥२॥
इ॒मं वी॒रमनु॑ हर्षध्वमु॒ग्रमिन्द्रं॑ सखायो॒ अनु॒ सं र॑भध्वम्।
ग्रा॒म॒जितं॑ गो॒जितं॒ वज्र॑बाहुं॒ जय॑न्त॒मज्म॑ प्रमृ॒णन्त॒मोज॑सा ॥३॥