SELECT MANDALA

SELECT SUKTA OF MANDALA 01

Rigveda – Shakala Samhita – Mandala 01 Sukta 097

A
A+

८ कुत्स आङ्गिरसः। अग्निः, शुचिरग्निर्वा। गायत्री।
अप॑ न॒: शोशु॑चद॒घमग्ने॑ शुशु॒ग्ध्या र॒यिम् । अप॑ न॒: शोशु॑चद॒घम् ॥१॥
सु॒क्षे॒त्रि॒या सु॑गातु॒या व॑सू॒या च॑ यजामहे । अप॑ न॒: शोशु॑चद॒घम् ॥२॥
प्र यद् भन्दि॑ष्ठ एषां॒ प्रास्माका॑सश्च सू॒रय॑: । अप॑ न॒: शोशु॑चद॒घम् ॥३॥
प्र यत्ते॑ अग्ने सू॒रयो॒ जाये॑महि॒ प्र ते॑ व॒यम् । अप॑ न॒: शोशु॑चद॒घम् ॥४॥
प्र यद॒ग्नेः सह॑स्वतो वि॒श्वतो॒ यन्ति॑ भा॒नव॑: । अप॑ न॒: शोशु॑चद॒घम् ॥५॥
त्वं हि वि॑श्वतोमुख वि॒श्वत॑: परि॒भूरसि॑ । अप॑ न॒: शोशु॑चद॒घम् ॥६॥
द्विषो॑ नो विश्वतोमु॒खाति॑ ना॒वेव॑ पारय । अप॑ न॒: शोशु॑चद॒घम् ॥७॥
स न॒: सिन्धु॑मिव ना॒वयाति॑ पर्षा स्व॒स्तये॑ । अप॑ न॒: शोशु॑चद॒घम् ॥८॥